सुंदरकाण्ड सुंदरकाण्ड में हनुमान का लंका प्रस्थान, लंका दहन से लंका से वापसी तक के घटनाक्रम आते हैं। नीचे सुंदरकाण्ड से जुड़े घटनाक्रमों की विषय सूची दी गई है। आप जिस भी घटना के बारे में पढ़ना चाहते हैं उसकी लिंक पर क्लिक करें। मंगलाचरण हनुमान्जी का लंका को प्रस्थान, सुरसा से भेंट, छाया पकड़ने वाली राक्षसी का वध लंका वर्णन, लंकिनी वध, लंका में प्रवेश हनुमान्-विभीषण संवाद हनुमान्जी का अशोक वाटिका में सीताजी को देखकर दुःखी होना और रावण का सीताजी को भय दिखलाना श्री सीता-त्रिजटा संवाद श्री सीता-हनुमान् संवाद हनुमान्जी द्वारा अशोक वाटिका विध्वंस, अक्षय कुमार वध और मेघनाद का हनुमान्जी को नागपाश में बाँधकर सभा में ले जाना हनुमान्-रावण संवाद लंकादहन लंका जलाने के बाद हनुमान्जी का सीताजी से विदा माँगना और चूड़ामणि पाना समुद्र के इस पार आना, सबका लौटना, मधुवन प्रवेश, सुग्रीव मिलन, श्री राम-हनुमान् संवाद श्री रामजी का वानरों की सेना के साथ चलकर समुद्र तट पर पहुँचना मंदोदरी-रावण संवाद रावण को विभीषण का समझाना और विभीषण का अपमान विभीषण का भगवान् श्री रामजी की शरण के लिए प्रस्थान और ...
अमर क्रांतिकारी और जन–निर्माता, चेत पाण्डेय
।। चेत पाण्डेय, करगहर के एक ब्राह्मण योद्धा,विस्तृत संस्करण ।। भारत का स्वतंत्रता संग्राम केवल दिल्ली , कोलकाता या लखनऊ की गलियों में नहीं लड़ा गया था। यह संघर्ष गाँव–गाँव , खेत–खलिहानों , और नहरों की मिट्टी में भी पनपा था। यह उन अनगिनत गुमनाम नायकों की कहानी है , जिनका नाम इतिहास की मोटी किताबों में नहीं मिलता , लेकिन जिनकी स्मृति आज भी लोक–कथाओं , बुज़ुर्गों की बातों और मिट्टी की गंध में जीवित है। ऐसे ही एक नायक थे— चेत पाण्डेय , करगहर के एक ब्राह्मण योद्धा , जिन्होंने न केवल अंग्रेज़ी सत्ता को चुनौती दी , बल्कि जन–निर्माण , आत्मनिर्भरता और सामाजिक एकजुटता की मिसाल भी कायम की। वे तलवार के साथ-साथ हल और फावड़े के प्रतीक थे। उनका जीवन इस बात का प्रमाण है कि स्वतंत्रता केवल युद्ध से नहीं , बल्कि समाज के पुनर्निर्माण से भी प्राप्त होती है। करगहर , जो आज एक शांत गाँव के रूप में जाना जाता है , कभी चेत पाण्डेय के नेतृत्व में संघर्ष , निर्माण और संगठन का केंद्र था। उन्होंने 385 गाँवों की ज़मी...