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जय राम रमा रमनं समनं

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यह स्तुति भगवान शिव द्वारा प्रभु राम के अयोध्या वापस आपने के उपलक्ष्य में गाई गई है। जिसके अंतर्गत सभी ऋषिगण, गुरु, कुटुम्बी एवं अयोध्या वासी कैसे अधीर हो कर अपने प्रभु रूप राजा राम की प्रतीक्षा कर रहे हैं। तथा श्री राम के आगमन पर कैसे सभी आनन्दित हैं, श्रीराम अपने महल को चलते है, आकाश से फूलों की वृष्टि होरही है। सब का वर्णन है इस स्तुति में.. ॥ छन्द: ॥ जय राम रमा रमनं समनं । भव ताप भयाकुल पाहि जनम ॥ अवधेस सुरेस रमेस बिभो । सरनागत मागत पाहि प्रभो ॥ राजा राम, राजा राम, सीता राम,सीता राम ॥ दससीस बिनासन बीस भुजा । कृत दूरी महा महि भूरी रुजा ॥ रजनीचर बृंद पतंग रहे । सर पावक तेज प्रचंड दहे ॥ राजा राम, राजा राम, सीता राम,सीता राम ॥ महि मंडल मंडन चारुतरं । धृत सायक चाप निषंग बरं ॥ मद मोह महा ममता रजनी । तम पुंज दिवाकर तेज अनी ॥ राजा राम, राजा राम, सीता राम,सीता राम ॥ मनजात किरात निपात किए । मृग लोग कुभोग सरेन हिए ॥ हति नाथ अनाथनि पाहि हरे । बिषया बन पावँर भूली परे ॥ राजा राम, राजा राम, सीता राम,सीता राम ॥ बहु रोग बियोगन्हि लोग हए । भवदंघ्री निरादर के फल ए ॥ भव सिन्धु अगाध परे नर ते । पद पंकज...
  🕉️ अध्यात्मिक भारत: आत्मा की खोज भारत को अक्सर धर्म और आस्था का देश कहा जाता है, लेकिन यह पहचान केवल मंदिरों, तीर्थों या कर्मकांडों तक सीमित नहीं है। भारत की असली आत्मा उसकी अध्यात्मिक चेतना में निहित है — एक ऐसी चेतना जो आत्मा, ब्रह्मांड और जीवन के गूढ़ प्रश्नों से सतत संवाद करती है। यह ब्लॉग भारत की उसी अध्यात्मिक विरासत का विश्लेषणात्मक अन्वेषण है। 📜 ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य: वेदों से भक्ति तक भारत की अध्यात्मिक यात्रा वैदिक युग से प्रारंभ होती है, जहाँ ऋषियों ने ब्रह्म और आत्मा के संबंधों पर गहन चिंतन किया। उपनिषदों में “अहं ब्रह्मास्मि” और “तत्त्वमसि” जैसे सूत्र केवल दार्शनिक वक्तव्य नहीं, बल्कि आत्मबोध की उद्घोषणा हैं। बौद्ध और जैन परंपराएँ त्याग, ध्यान और अहिंसा के माध्यम से आत्मज्ञान की राह दिखाती हैं। भक्ति आंदोलन ने अध्यात्म को जन-जन तक पहुँचाया — कबीर, तुलसी, मीरा जैसे संतों ने प्रेम और समर्पण को साधना का माध्यम बनाया। सूफी संतों ने आत्मा और परमात्मा के मिलन को रूपक और संगीत के माध्यम से व्यक्त किया। यह विविधता दर्शाती है कि भारत में अध्यात्मिकता...

अयोध्या

अयोध्या उत्तर प्रदेश में नगर जानकारी अयोध्या, भारत के राज्य उत्तर प्रदेश के अयोध्या जिले का एक नगर और जिले का मुख्यालय है। सरयू नदी के तट पर बसा अयोध्या एक अति प्राचीन धार्मिक नगर है। मान्यता है कि इस नगर को मनु ने बसाया था और इसे 'अयोध्या' का नाम दिया जिसका अर्थ होता है अ-युध्य अर्थात् 'जिसे युद्ध के द्वारा प्राप्त न किया जा सके।  क्षेत्रफ़ल:  79.8 km² ऊंचाई:  93 मी राज्य:  उत्तर प्रदेश मौसम:  27 °C, 2 किमी/घ की रफ़्तार से उ॰प॰ की ओर हवा, 79% नमी जनसंख्या:  55,890 (2011) स्थानीय समय:  शुक्रवार 10:30 pm

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